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अष्टधातु, आठ  धातुओं यानि सोना, चाँदी, तांबा, रांगा, जस्ता, सीसा, लोहा, तथा पारा (रस) से मिलकर बना होता है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर धातु में निहित ऊर्जा होती है. धातु अगर सही समय में और ग्रहों की सही स्थिति को देखकर धारण किये जाएं तो इनका सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है अन्यथा धातु विपरीत प्रभाव भी देता हैं | ….क्रमश:

यह गुटिका, ब्रहमांड की दुर्लभतम वस्तुओ में से एक है । इसको धारण करने वाले जातक को तीव्र अध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होते है। इस गुटिका से विशेष प्रकार की प्रबल उर्जा तरंगे निकलती है। ….क्रमश:

भावप्रकाश में पारा चार प्रकार का लिखा गया है— श्वेत, रक्त, पीत और कृष्ण । इसमें श्वेत श्रेष्ठ है । वैद्यक में पारा कृमिनाशक और कुष्ठनाशक, नेत्रहितकारी, रसायन, मधुर आदि छह रसों से युक्त, स्निग्ध, त्रिदोषनाशक, योग-वाही, शुक्रवर्धक और एक प्रकार से संपूर्ण रोगनाशक कहा गया है । पारे में मल, वह्नि, विष, नाम इत्यादि कई दोष मिले रहते हैं, इससे उसे शुद्ध करके प्रयोग में लाना ….क्रमश:

इस गुटिका का निर्माण रत्न के सत्व को अष्ट संस्कारित पारद के साथ विशेष मुहूर्त में सायुज्जीकरण करके किया जाता है. धारण से पूर्व इसका जातक के लिए प्राण-प्रतिष्ठा और अभिमन्त्रण किया जाता है. इसके धारण करने से जातक को रत्न के सम्पूर्ण सकारात्मक प्रभाव का लाभ मिलता है. ….क्रमश: